UP में 9 साल से भटक रहे अभ्यर्थी, अब पार हो गई उम्र की सीमा!"
UP में 9 साल से नियुक्ति के लिए भटक रहे अभ्यर्थी, ओवर ऐज भी होने लगे, छलका दर्द!
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में वर्षों से विभिन्न विभागों में नियुक्ति का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। बीते 9 साल से नियुक्ति का सपना संजोए अभ्यर्थी न सिर्फ सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, बल्कि अब वे ओवर ऐज (Over Age) भी होने लगे हैं। ऐसे में उनके सपनों पर पानी फिरता दिख रहा है और उनके चेहरों पर हताशा और निराशा साफ झलक रही है।
क्या है मामला?
2015 से लेकर 2018 के बीच राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में भर्ती की अधिसूचनाएं जारी की थीं, जिनमें हजारों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार तक पास कर लिया।
लेकिन इन भर्तियों की प्रक्रिया या तो अधर में लटक गईं या फिर न्यायालय में लंबित याचिकाओं के चलते रुकी रहीं। परिणामस्वरूप, कई अभ्यर्थियों की उम्र अब 35-40 वर्ष के पार हो गई है, और वो अब नई नौकरियों के लिए पात्र नहीं रह गए हैं।
दर्दभरी दास्तान
लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थी अजय सिंह कहते हैं:
"मैंने 2016 में परीक्षा दी थी, इंटरव्यू भी हुआ लेकिन आज 2025 आ गया है और अभी तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला। अब मेरी उम्र 36 साल हो चुकी है और मैं किसी अन्य सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने के योग्य भी नहीं रहा।"
ऐसे ही एक अन्य अभ्यर्थी सीमा गुप्ता, जो शिक्षिका बनना चाहती थीं, बताती हैं:
"हर साल सरकारें आती जाती रहीं, वादे किए जाते रहे, लेकिन हम अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका रहा। अब परिवार से ताने सुनने पड़ते हैं कि ‘नौकरी के लिए कितने साल लगेंगे और क्या मिलेगा?’"
सरकारी रवैये से नाराज़गी
इन अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकारें सिर्फ वादे करती हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
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कई बार नियुक्ति को लेकर शासनादेश (GO) जारी हुए, लेकिन जमीन पर अमल नहीं हुआ।
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कुछ भर्तियों पर न्यायिक रोक लगी, तो कुछ में नियमावली बदल दी गई जिससे पहले से चयनित अभ्यर्थी बाहर हो गए।
इससे भी ज़्यादा चिंता की बात ये है कि कुछ मामलों में भर्ती बोर्ड ही भंग कर दिए गए या फिर नई एजेंसी बना दी गई, जिससे पुराने अभ्यर्थियों की प्रक्रिया फिर से जीरो पर आ गई।
ओवर ऐज की समस्या
9 साल का इंतजार झेल चुके कई उम्मीदवार अब सरकारी नियमों के मुताबिक अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं।
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उत्तर प्रदेश में अधिकांश सरकारी नौकरियों में जनरल वर्ग के लिए अधिकतम उम्र 40 साल होती है, जबकि OBC और SC/ST को आयु में छूट मिलती है।
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लेकिन जब अभ्यर्थी ने आवेदन किया, तब उनकी उम्र सही थी, पर नियुक्ति में देरी की कीमत उन्हें ओवर ऐज होकर चुकानी पड़ रही है।
न्यायिक हस्तक्षेप की मांग
अब अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार लगाई है कि या तो उन्हें उम्र सीमा में छूट दी जाए या फिर तुरंत नियुक्ति दी जाए, क्योंकि ये सरकारी लापरवाही की वजह से हुई देरी है, न कि उनकी।
सरकार क्या कहती है?
सरकार की ओर से कुछ मौकों पर आश्वासन दिए गए हैं कि जल्द नियुक्तियों पर निर्णय लिया जाएगा।
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अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में विधिक अड़चनें हैं, तो कुछ मामलों में वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार है।
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हालांकि, जमीनी हकीकत यही है कि अभी तक किसी ठोस समयसीमा की घोषणा नहीं हुई है, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी और असंतोष है।
राजनीतिक मुद्दा बनता मामला
चूंकि 2027 के चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में विपक्षी दल इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने में लगे हैं।
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समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दल सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि ये सरकार युवाओं को रोजगार देने में विफल रही है।
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वहीं अभ्यर्थियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर जल्द उन्हें नियुक्ति नहीं मिली तो वे सड़कों पर बड़ा आंदोलन करेंगे।
निष्कर्ष
UP में 9 साल से नियुक्ति की आस लगाए बैठे अभ्यर्थियों की कहानी सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया की देरी नहीं, बल्कि सपनों और उम्र के बर्बाद होने की पीड़ा है।
अगर सरकार ने जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो न केवल ये हजारों युवा अपने हक के लिए आवाज़ उठाएंगे, बल्कि सिस्टम पर से उनका भरोसा भी टूट जाएगा।
अब सिर्फ एक नियुक्ति पत्र नहीं, बल्कि उनका सम्मान और भविष्य दांव पर ह

