Breaking उन्नाव रेप पीड़िता की CRPF सुरक्षा बरकरार, परिजनों और गवाहों की सुरक्षा हटाई गई!"
उन्नाव रेप पीड़िता की CRPF सुरक्षा बरकरार, लेकिन परिजनों और गवाहों की सुरक्षा हटाई गई!
उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप केस से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रेप पीड़िता की सुरक्षा बरकरार रखी गई है, लेकिन उसके परिजनों और गवाहों की सुरक्षा को हटा दिया गया है। यह निर्णय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लिया गया, जिससे अब परिजनों और गवाहों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2017 में हुए उन्नाव रेप केस से जुड़ा है, जिसमें पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया गया था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
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पीड़िता के साथ अमानवीय अपराध हुआ और उसने न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
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इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में पीड़िता और उसके परिवार को CRPF सुरक्षा देने का आदेश दिया था।
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लेकिन अब सुरक्षा एजेंसियों ने पीड़िता को छोड़कर बाकी सभी की सुरक्षा हटा दी है, जिससे उसके परिवार और गवाहों में डर का माहौल बन गया है।
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क्यों हटाई गई सुरक्षा?
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने केस की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के बाद यह फैसला लिया।
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उनका कहना है कि अब केस अपने अंतिम चरण में है और खतरा पहले की तुलना में कम हो गया है।
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सीआरपीएफ सुरक्षा की लागत भी अधिक होती है, इसलिए समीक्षा के बाद परिजनों और गवाहों की सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया गया।
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हालांकि, कई सामाजिक संगठनों और पीड़िता के परिवार ने इस फैसले का विरोध किया है।
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परिवार और गवाहों ने जताई चिंता
पीड़िता के परिवार और गवाहों का कहना है कि उनकी जान को अभी भी खतरा है।
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उन्होंने प्रशासन से फिर से सुरक्षा देने की मांग की है।
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पीड़िता की मां ने कहा, "हमने पहले भी जानलेवा हमले झेले हैं। अगर हमारी सुरक्षा हटा ली गई, तो हमें और भी ज्यादा खतरा हो सकता है।"
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गवाहों का भी यही कहना है कि आरोपियों के प्रभाव और दबाव के चलते वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
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क्या कह रही है सरकार?
सरकार और प्रशासन का कहना है कि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
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सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अगर किसी भी तरह का खतरा महसूस होता है, तो फिर से सुरक्षा देने पर विचार किया जाएगा।
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पुलिस प्रशासन ने यह भी कहा कि स्थानीय पुलिस निगरानी रखेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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पहले भी झेल चुके हैं हमले
गौरतलब है कि 2019 में उन्नाव रेप पीड़िता की गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उसके दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी।
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इस घटना को संदिग्ध माना गया था, और आरोपियों पर हत्या की साजिश रचने का मामला भी दर्ज हुआ था।
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इसके अलावा, गवाहों पर भी कई बार हमले किए गए थे, जिससे मामला और संवेदनशील बन गया था।
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अब आगे क्या होगा?
परिजनों और गवाहों की सुरक्षा हटाने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।
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सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि परिजनों की सुरक्षा फिर से बहाल की जाए।
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विपक्षी दलों ने भी सरकार पर इस फैसले को लेकर निशाना साधा है।
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प्रशासन ने कहा है कि अगर स्थिति बिगड़ती है, तो सुरक्षा देने पर पुनर्विचार किया जाएगा।
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निष्कर्ष
उन्नाव रेप पीड़िता की CRPF सुरक्षा बरकरार रखी गई है, लेकिन परिजनों और गवाहों की सुरक्षा हटाने से एक बार फिर मामला सुर्खियों में आ गया है।
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परिजनों और गवाहों को अभी भी खतरे की आशंका है, इसलिए सवाल उठ रहा है कि क्या यह फैसला उचित है?
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यह देखना होगा कि सरकार और न्यायपालिका इस पर आगे क्या कदम उठाती है।
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यह मामला एक बार फिर बता रहा है कि न्याय मिलने के बाद भी पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा कितनी जरूरी होती है।
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